झारखंड हाईकोर्ट ने श्रम विभाग में अनुकंपा पर नियुक्ति के मामले में प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को अवमानना का नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई में सशरीर हाजिर होने का निर्देश दिया है.
इसके साथ ही कोर्ट ने कड़ी नाजगी जाहिर करते हुए पूछा कि क्या प्रधान सचिव से रांची के डीसी उपर हैं, जिसने प्रधान सचिव के आदेश को मानने से इनकार कर दिया. वहीं, श्रम विभाग के प्रधान सचिव को उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया गया है वर्ष 2019 में उनके द्वारा नियुक्ति का आदेश देने के बाद भी उपायुक्त ने उसका पालन क्यों क्यों नहीं किया. और उपायुक्त के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई.
जस्टिस सुजीर नारायण प्रसा जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के बाद रांची के उपायुक्त सह अनुकंपा समिति के अध्यक्ष मंजूनाथ भजंत्री को हाईकोर्ट के रूल्स 393 के तहत अवमानना का नोटिस जारी किया. इस मामले में अगली सुनवाई पांच मई को होगी. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय ने पैरवी कर पक्ष रखा.
क्या है मामला
श्रम विभाग के कर्मी राजकुमार राम के निधन के बाद उनके बड़े बेटे अनिल कुमार ने अनुंकपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन दिया था. इस आवेदन को विभाग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनकी उम्र सीमा नौकरी के लिए अधिक हो गई है. इसलिए नियुक्ति नहीं की जा सकती. छोटे भाई रूपेश की उम्र नौकरी के लिए सही है. तब अनिल कुमार ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर विभाग के निर्णय को चुनौती दी थी. वह रिट खारिज हो गई.
फिर अपील याचिका दायर की गई. छोटे भाई ने भी रिट याचिका दायर की थी. दोनों याचिका पर एक साथ सुनवाई हुई. अपील खारिज हो गई. लेकिन रिच याचिका में कोर्ट ने रूपेश रंजन की नियुक्ति को लेकर प्रधान सचिव के आदेश के अनुसार रांची के उपायुक्त को निर्णय लेने को कहा था.
तब शपथ पत्र में क्या बताया
उपायुक्त की ओर से कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर बताया गया कि मृतक के बड़े पुत्र ने अनापत्ति पत्र नहीं दिया है. इसलिए छोटे पुत्र रूपेश रंजन को अनुकंपा के आधार पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है. अनुकंपा समिति ने रूपेश के आवेदन को रद्द कर दिया है, जिस पर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जाहिर कहते हुए मामले को गंभीरता से लिया है.
