रामगढ़ः रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड का एक छोटा सा गांव नेमरा शोक में डूबा है. दिशोम गुरुजी दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन के निधन की खबर से ही गांव के लोगों में बेचैनी थी. दिन में हेमंत सोरेन कठिन पलों के बीच मां का पार्थिव शरीर लेकर जैसे ही अपने पैतृक गांव पहुंचे, यह शोक गहरा हो गया. इस दौरान चुनमुन-चिरैया भी खामोश.
हेमंत के आवास पर लोगों की भीड़ और घर के अंदर से महिलाओं के रोने की आवाज. सिसकियां लेते बच्चे. रूपी सोरेन की बेटी अंजली सोरेन दहाड़ मारकर रोती रहीं. हेमंत सोरेन की पत्नी और जेएमएम की विधायक कल्पना सोरेन उन्हें संभालतीं दिखी. इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया.

आंसुओं में डूबे हेमंत सोरेन ने मां की अर्थी को कांधा दिया और फिर मुखाग्नि. चिता से उठती लपटों को डबडबायी आंखों से निहारते रहे. अगल बगल बैठे हित- कुटुंब. सबके चेहरे पर उदासी और आंखों में खालीपन. देखते ही देखते रूपी सोरेन पंचतत्व में विलीन हो गयीं.
अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और नम आंखों से उन्हें विदाई दी.

14 महीने के दौरान माता-पिता दोनों को खोया
14 महीने के दौरान हेमंत ने अपने माता-पिता दोनों को खोया है. पिछले साल 5 अगस्त को इसी नेमरा की धरती में उन्होंने अपने पिता शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ संताली रस्मों के बीच किया था. दिशोम गुरुजी का निधन चार अगस्त को हुआ था.
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को 80 साल की उम्र में रूपी सोरेन का निधन रांची के एक निजी अस्पताल हिल व्यू में हो गया. वे कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं. रात में ही उनका पार्थिव शरीर मोराबादी स्थित दिशोम गुरुजी के आवास पर लाया गया.
शिबू सोरेन के राजनीतिक सफर और आंदोलन के संघर्ष को एक पत्नी के तौर पर रूपी सोरेन ने नजदीक से देखा-जाना था. और इस दौरान परिवार की जिम्मेदारियां भी संभालीं. दिशोम गुरुजी के महाजनी आंदोलन के दौरान भी उन्होंने जीवन के उतार-चढ़ाव देखे, पर कभी डिगी नहीं.
इसी साल 23 जून को संसद भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था. यह सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन को सौंपा गया.
इस अवसर पर शिबू सोरेन की बहू, जेएमएम की विधायक कल्पना सोरेन, पुत्री अंजनी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे थे.
वह छांव भी प्रकृति में समा गयी
मां के निधन पर हेमंत सोरेन ने एक्स पर अपनी वेदना प्रकट करते हुए कहा, “बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं. आज वह छाँव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं. माँ…. पिता के साये के बाद अब माँ का आँचल भी छूट गया..जिस आँचल ने जीवन के हर मोड़ पर संभाला, आज वही आँचल हमेशा के लिए दूर हो गया”…

गुरुवार की सुबह पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन को लेकर बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता और अधिकारी पहुंचे. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी मोराबादी पहुंचकर श्रद्धांजलि दी.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी अपनी श्रद्धांजलि देने नेमरा पहुंचे. हेमंत कैबिनेट के कई मंत्री सुबह से गांव में मौजूद रहे. रूपी सोरेन के निधन पर शोक संदेश का तांता लगा रहा.
इससे पहले नेमरा गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां गुरुवार सुबह से ही तेज रहीं. रामगढ़ और हजारीबाग जिला प्रशासन के अधिकारी सुबह से ही नेमरा पहुंचकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे.
बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी.
