दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सोमवार को मार्च निकाल रहे विपक्षी नेता भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद पुलिस को चकमा देते हुए तिलक मार्ग से सुप्रीम कोर्ट के गेट बी तक पहुंच गए.
समाचार एजेंसी एनएनआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में इंडिया ब्लॉक के नेता, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पहुंचे. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं के साथ मिलकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. अपनी याचिका में, विपक्षी गठबंधन ने ईसीआई के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी पक्षकार बनाया है.
राहुल गांधी की टीम ने बताया कि इंडिया ब्लॉक के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी.
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “हम आपको विस्तार से बताएंगे कि मामला क्या है, आधार क्या हैं, सब कुछ बताया जाएगा; हमने यहां अपनी याचिका दर्ज करा दी है.”
इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने भगवान दास मार्ग से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की कोशिश की थी, लेकिन उनका यह प्रयास सफल नहीं हुआ. इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई.
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि पुलिस ने इंडिया गेट सर्कल पर उन्हें रुकने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद काफ़िला दूसरे रास्ते पर आगे बढ़ा. फ़िलहाल, सभी नेता सुप्रीम कोर्ट के गेट बी के अंदर पहुंच गए हैं.
उधर शाम को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया.
मार्च में प्रियंका गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव के अलावा ममता बनर्जी, आइसा की छात्र नेता नेहा बोरा समेत विपक्ष के कई नेता शामिल हैं. समेत कई प्रमुख नेता शामिल थे.
इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की गई है.
लाइव लॉ और बार एंड बेंच के अनुसार, इसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं.
याचिका दाखिल करने वालों में राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव समेत 11 लोग शामिल हैं.
क्या है याचिका में
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक इसमें चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) से जुड़े फैसलों के तरीके को चुनौती दी गई है. इसमें विवादित फैसलों से जुड़ी EC की पूरी फाइलें, एजेंडा, बैठक का विवरण (मिनट्स), नोटिंग और आपत्तियों का खुलासा करने की मांग की गई है.
इनमें SIR शुरू करने का 24 जून, 2025 का फैसला और ECINET व ERONET के एक्सेस लॉग भी शामिल हैं। इसमें इस बात की न्यायिक जांच की भी मांग की गई है कि क्या ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून और ‘टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार लिए गए थे.
याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि कोर्ट यह सुनिश्चित करे कि किसी भी वोटर का नाम बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए न हटाया जाए. साथ ही, हटाए गए वोटरों की सूची बूथ-वार प्रकाशित करने और उसमें नाम हटाने के कारण व डेमोग्राफिक जानकारी शामिल करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है. इसमें ECINET और ERONET सहित वोटर लिस्ट डेटाबेस में नाम हटाने और बदलावों की ऑडिट के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की भी मांग की गई है.
याचिका में मामले के निपटारे तक चल रहे SIR पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है। याचिका में विशेष रूप से कोर्ट से मांग की गई है कि वह ECI को निर्देश दे कि वह यह सुनिश्चित करे कि “स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न से जुड़ा चुनाव आयोग का हर फैसला 2023 के कानून के अनुसार लिया जाए और उसका विधिवत रिकॉर्ड (मिनट्स) रखा जाए.”
इसमें यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि “कानून के अनुसार बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए वोटर लिस्ट से किसी भी वोटर का नाम न हटाया जाए.”
