विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा की सीआइडी जांच को महज दिखावा बताया है. उन्होंने कहा है कि साक्ष्यों और सबूतों को नष्ट करने या छिपाने के मकसद से यह कार्रवाई हो रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अगर इस मामले में गंभीर हैं, तो सीबीआइ से जांच कराएं.
मरांडी ने आरोप लगाया कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा गड़बड़ी मामले राज्य सरकार ही सारा गड़बड़ करवा रही है. राज्य सरकार का मतलब मुख्यमंत्री होता है. अगर मुख्यमंत्री मामले में पूरी तरह पाक-साफ हैं तो उन्हें सीबीआई जांच से आपत्ति क्यों है ?
पार्टी कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस में मरांडी ने कहा कि देखने-सुनने में बहुत ही अच्छा लग रहा है कि राज्य सरकार बहुत ही त्वरित कार्रवाई कर रही है. परंतु सब केवल लीपापोती के सिवाय कुछ नहीं है.
सीआईडी जांच छात्रों को न्याय दिलाने के लिए नहीं बल्कि छात्रों के साथ अन्याय करने वाले माफियाओं को बचाने के लिए की जा रही है. क्योंकि सत्ता में बैठे लोग भली-भांति जानते हैं कि जिस दिन इस मामले की निष्पक्ष जांच हो जाएगी, सारे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे और इसके लपेटे में पर्दे के पीछे छिपे तमाम लोग गिरफ्त में होंगे।. इसलिए इस जांच के नाम पर आईवाश किया जा रहा है.
किसके बयान पर एफआईआर
मरांडी ने कहा कि जेपीएससी घोटाला मामले में एफआईआर किसके बयान पर किया गया, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है. एफआईआर अभी तक पब्लिक डोमेन में नहीं होने और एफआईआर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड नहीं किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जान बूझकर एफआईआर को कमजोर किया जा रहा है ताकि दोषियों को इसका लाभ मिल सके.
ख्यांग्ते को गिरफ्तार किया जाए
उन्होंने सीआईडी के अपर महानिदेशक मनोज कौशिक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि मनोज कौशिक अभी मुख्यमंत्री के काफी चहेते अफसर बने हुए हैं, इन्हें तीन तीन पदों पर रखा गया है.
कर्नाटक के एक छात्र ने जनवरी में ही जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को पत्र लिखकर ओएमआर शीट में गड़बड़ी और टीडीपी के कर्मचारी अभय तिवारी की कारस्तानी के संबंध में बतलाया था. सरकार को एल. ख्यांग्ते के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
40 लाख का रेट है
मरांडी ने आरोप लगाया झारखंड में एक अफसर बनने के लिए 40 लाख रुपए घूस ली जाती है. उनके पास जो जानकारी है उसके अनुसार पीटी परीक्षा पास कराने के लिए 5 लाख, मेंस परीक्षा के लिए 25 लाख रुपये और साक्षात्कार पास कराने के लिए 10 लाख रुपये, कुल 40 लाख वसूले जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने सभी जगह पर ऐसे ही भ्रष्ट अफसरों की तैनाती कर रखी है। जेएसएससी में सुधीर गुप्ता ऐसे ही भ्रष्ट हैं. उन्होंने पूर्व मुख्य परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए.
