पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर जारी अटकलों को विराम लग गया है. थोड़ी देर पहले नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का एलान कर दिया है.
उन्होंने सोशल मीडिया के अपने एक्स अकाउंट पर कहा है, “पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है. उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है. आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है. संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ. इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं.”
नीतीश कुमार ने कहा है, “पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है. संसदीय जीवन शुरू करने मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा. जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा.”
गौरतलब है कि कुल 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 16 मार्च को होने हैं. मतों की गिनती उसी दिन की जाएगी. ये सीटें अप्रैल में रिक्त हो रही हैं.
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव
नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के फैसले के साथ ही यह तय हो गया कि बिहार में दो दशकों के बाद राज्य की सियासत और सत्ता में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है.
नीतीश कुमार लेकर बिहार के सियासी गलियारों में पिछले कुछ घंटों से यह चर्चा चल रही थी कि वो बिहार की सत्ता से अलग राज्यसभा का रुख़ करने वाले हैं.
इसे लेकर राजनीतिक हलके में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है.
गुरुवार सुबह इन ख़बरों को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू के कई कार्यकर्ता बिहार में मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहना चाहिए .
होली के दिन बुधवार को भी जदयू के कई कार्यकर्ता नीतीश कुमार से राज्यसभा नहीं जाने की अपील करते दिखे.
नीतीश कुमार साल 2005 से लगातार बिहार में सत्ता का पर्याय बने हुए थे. वे दस बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले राजनेता है. वे बिहार की राजनीति और सत्ता की निर्णायक धुरी रहे हैं.
2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 85 सीटें जीती है.
हालांकि साल 2014-15 में कुछ महीनों के लिए उन्होंने अपनी पार्टी से जीतन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया था.
इसके बाद नीतीश कुमार वापस सीएम की कुर्सी पर आ गए थे और कहा जाता था कि बिहार में किसी भी गठबंधन की सरकार बने, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही होते हैं.
बदली परिस्थितियों और समीकरणों में यह माना जा रहा है कि अब बिहार में मुख्यमंत्री की कमान बीजेपी के पास होगा. इसके साथ ही नीतीश कुमार के बेटे निशांत के राजनीति में शामिल होने की संभावनाएं प्रबल हैं.
