रांचीः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि जेपीएससी की परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी की जांच सरकार की ‘कठपुतली एजेंसी सीआइडी’ कर रही है.
इस जांच एजेंसी की सत्यनिष्ठा और कार्यप्रणाली पर अब आम जनता का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है.
एक्स पर दो पोस्ट में मरांडी ने परीक्षाओं में गड़बड़ियों की जांच पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि जिस सीआइडी ने सीजीएल परीक्षा धोखाधड़ी में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच की प्रकृति ही बदल दी और अपनी नाकामी व असली दोषियों को छिपाने के लिए सारा दोष नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर मढ़ दिया, उससे जेपीएससी घोटाले में न्याय की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है. सीआइडी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को गुमराह किया और अहम साक्ष्य छिपा लिए.
उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के केंद्र में सीआइडी के एडीजी मनोज कौशिक हैं, जिनका खुद दागदार इतिहास रहा है. ऐसे अधिकारी को सरकार ने मेहरबानी करते हुए तीन-तीन अहम पदों से नवाजा है, जबकि कई योग्य अधिकारी बिना काम के बैठे हैं.
पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी क्यों नहीं
उन्होंने कहा कि जेपीएससी चेयरमैन से चार-चार बार पूछताछ होने के बावजूद आज तक उनकी गिरफ्तारी न होना और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी पर सारा ठीकरा फोड़ने का प्रयास यह साबित करता है कि सीआईडी जांच और तलाशी की आड़ में असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश चेहरों को बचाने का खेल खेल रही है. एक पेशेवर जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली के बिल्कुल उलट, सीआइडी जानबूझकर जांच के परिणामों को नियमित रूप से मीडिया में लीक कर रही है. इसका एकमात्र उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाकर और भ्रम फैलाकर अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव सेट करना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे सीजीएल मामले में सिर्फ नेपाल जाने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराने की साजिश रची गई थी.
