मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि वो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंज़ूरी के बिना चुनाव आयोग के नाम पर फ़ैसले ले रहे हैं.
बार एंड बेंच के मुताबिक़ राकेश कुमार सिंह की याचिका में ‘क्वो वारंटो’ की रिट की मांग की गई है. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत ऐसे फै़सले लिए और अब भी ले रहे हैं, जैसे कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग को मिले सामूहिक निर्णय लेने के अधिकार का इस्तेमाल वह अकेले करने के हकदार हों.
लाइव लॉ ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की गई है.
क्या है क्वो वारंटो
भारतीय संविधान के प्रावधानों के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में 5 तरीके के रिट दायर किए जा सकते हैं. इनमें ‘क्वो वारंटो’ भी शामिल है.
यह रिट मुख्य रूप से तब जारी की जाती है जब कोई व्यक्ति बिना अधिकार के किसी सार्वजनिक पद पर क़ब्ज़ा कर लेता है.
भारत में चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं.
फिलहाल ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी दो अन्य चुनाव आयुक्त हैं.
जब तीनों के बीच किसी मुद्दे पर सहमति नहीं होती है, तो फै़सला बहुमत के आधार पर लिया जाना होता है.
हालांकि, अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की हाल की रिपोर्टों के मुताबिक़, ज्ञानेश कुमार ने दो चुनाव आयुक्तों की असहमति के बावजूद कई फैसले लिए.
