सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सवाल उठाए हैं.
लोकसभा में नेता, प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अब यह “साबित” हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फ़ॉर्म-6 में “ग़ैर-क़ानूनी और एकतरफ़ा” बदलाव किया.
उन्होंने चुनाव आयोग के 26 सितंबर के उस प्रेस नोट को भी साझा किया, जिसमें आयोग ने कहा था कि एसआईआर के लिए फ़ॉर्म-6 के साथ लगाए गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि अगर जरा भी नैतिकता बची हो, तो आज सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
प्रमोद तिवारी ने कहा, “अपने पद और संस्थान की गरिमा बनाए रखने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. अगर वे इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो हम कल शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे.”
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी कहा कि फ़ॉर्म-6 में किया गया बदलाव “दुर्भावनापूर्ण” था और ज्ञानेश कुमार ने इस मामले में “झूठ” बोला, क़ानून का उल्लंघन किया और संविधान के साथ विश्वासघात किया.
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सवाल उठाया कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने फ़ॉर्म-6 में बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी थी, तो इसे किसने मंज़ूरी दी और किसके आदेश पर बदला गया.
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए.
वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस दिया जाना इस बात का सबूत है कि देश की संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि देश “बहुत लोकतांत्रिक तरीक़े” से आगे बढ़ रहा है और सभी प्रक्रियाओं का पालन हो रहा है.
