रांचीः आजसू पार्टी की 10 अक्टूबर को ईचागढ़ में विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन है. ठीक इसके अगले दिन आजसू से इस्तीफा देने वाले हरेलाल महतो 11 अक्टूबर बीजेपी में शामिल होंगे.
हरलेलाल इस कार्यक्रम को दमदार बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे.
भादूडीह चांडिल मैदान में होने वाले इस मिलन समारोह सह सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में प्रदेश बीजेपी के कई बड़े नेता शामिल होंगे.
इससे पहले पांच अक्टूबर को हरेलाल महतो रांची स्थित बीजेपी के कार्यालय में आए थे.
यहां उन्होंने पार्टी के झारखंड प्रभारी गजेंद्र पटेल, सह प्रभारी सौरभ सिंह निवेदिता सिहं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, महामंत्री अमर बाउरी समेत अन्य कई नेताओं से मुलाकात के बाद तस्वीरें साझा की थीं.
बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में हरेलाल महतो के अलावा ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से आजसू के कई नेताओं और प्रखंड अध्यक्षों ने भी इस्तीफा दे दिया है.
बाद में पूर्वी सिंहभूम जिला कमेटी के भी कई नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले केंद्रीय महासचिव रविशंकर मौर्या ने भी इस्तीफा दे दिया.
हरेलाल महतो के इस्तीफे के बाद
गौरतलब है कि हरेलाल महतो ने 26 सितंबर को पार्टी से इस्तीफा दिया था. हालांकि पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने की पकती खिचड़ी की हांडी पहले से चूल्हे पर चढ़ी थी. जाहिर तौर पर आजसू को भी इस पकती खिचड़ी की महक थी, लेकिन उसकी इस हांडी को ठंडा करने की कोशिशें, दांव-पेच काम नहीं आया.
हरेलाल और अन्य नेताओं के इस्तीफे से पार्टी में खदबदाहट के बीच तीन अक्टूबर को आजसू पार्टी की केंद्रीय केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो के बुकरू स्थित आवास पर हुई. बैठक में संगठन को सशक्त करने, 11 अक्टूबर को गिरिडीह विधानसभा के पीरटांड़ में ’युवा संवाद’ कार्यक्रम आयोजित करने समेत अन्य सांगठनिक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. अंदरखाने की खबर है कि बैठक में हरेलाल के इस्तीफे और बीजेपी में जाने की राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा होती रही, पर इसका इजहार नहीं किया गया.

सहिस को आगे किया
इस बीच पार्टी प्रमुख सुदेश कुमार महतो ने पार्टी के प्रधान महासचिव और पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस को आगे किया और ईचागढ़ में दस अक्टूबर को विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारी शुरू हो गई. राजनीति में टाइम, टोन के मायने होते हैं. आजसू की इस बैठक के भी मायने निकाले जाने लगे. दरअसल हरेलाल का बीजेपी में जाने का कार्यक्रम 11 अक्टूबर तय है.
रामचंद्र सहिस पिछले तीन दिनों से ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को पार्टी के पाले में बचाये रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं. दस अक्टूबर को रघुनाथपुर प्रखंड, नीमडीह में कार्यकर्ता सम्मेलन होना है. इसी बहाने ईचागढ़ क्षेत्र में आजसू अपने पुराने कार्यकर्ताओं को भी पुचकारने की जुगत में है, जो अब तक अलग-थलग पड़े हुए थे.
लगातार दो बार जुसलाई में हार का सामना करने वाले सहिस और पार्टी प्रमुख पूर्वी सिंहभूम और ईचागढ़ में हाशिये पर जाती पार्टी को संकटों से उबारने में कितना कामयाब होते हैं यह देखा जाना बाकी है.

देखना बाकी होगा कि हरेलाल के बीजेपी में ज्वाइन करने के बाद वहां राजनीतिक तस्वीर कैसी उभरती है और उनके कद के किस नेता को आजसू खड़ा कर सकती है. 2005 से ही सुदेश महतो की प्रथामिकता में यह सीट रही है, लेकिन कभी पार्टी को जीत नहीं मिली.
झारखंड में 2024 के चुनाव नतीजे इसकी तस्दीक करती हैं कि जयराम महतो की पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मर्चा कुर्मी फैक्टर इलाकों में आजसू के लिए खतरा बनकर उभरी है.
ईचागढ़ में भी जयराम के उम्मीदवार ने समीकरणों के लिहाज से आजसू का खेल बिगाड़ा.
बड़ा सवाल-क्या होगा आगे
साधन-सुविधा से मजबूत हरेलाल महतो ईचागढ़ समेत सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम मे आजसू के लिए बड़ा चेहरा थे. माना ये भी जाता है कि वे अपने बूते ही आजसू को एक मजबूत ध्रुव के तौर पर वहां खड़ा किया. हालांकि 2019 और 2024 का वे चुनाव नहीं जीत सके.
लेकिन 2024 में आजसू की करारी हार के बाद जो समीकरण उभरे और पार्टी को जैसा सेटबैक मिला, उसमें आगे की संभावनाओं को देखते हुए ही हरेलाल ने समय से पहले ही नया ठौर तलाशना मुनासिब समझा.
बनते-बिगड़ते समीकरणों में हरेलाल महतो को बीजेपी अगले चुनाव में आजमाना चाहेगी. दरअसल ईचागढ़ में पिछले कई चुनावों से जेएमएम-बीजेपी के बीच मुकाबला होता रहा है. लेकिन अब जेएमएम ने वहां उभार लिया है.
2019 और 2024 में जेएमएम की सविता महतो यहां से जीती हैं. इससे पहले उनके पति दिवंगत सुधीर महतो भी ईचागढ़ से चुनाव जीते थे. 2024 में यह सीट बीजेपी ने आजसू के लिए छोड़ी थी.
ईचागढ़ में एक और कोण हैं अरविंद सिंह. वे बीजेपी और जेवीएम से वहां चुनाव जीते थे. ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र रांची संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है. हरेलाल के बीजेपी में आने से कुर्मी वोटों का समीकरण बीजेपी के लिए फायदे वाला हो सकता है.
दूसरा- चुनाव हारने के बाद भी हरेलाल राजनीतिक तौर पर निरंतर सक्रिय रहे हैं. आजसू चाहकर भी फिलहाल हरेलाल के कद में कोई विकल्प खड़ा करने की स्थिति में नहीं है. संगठन वहां चलता रहे फिलहाल उसके सामने यही बडी चुनौती होगी. इन्हीं कारणों से आजसू के माथे पर बल पड़े हैं और बेचैनी यह कि हरेलाल महतो बीजेपी में जा रहे हैं.
हाल ही में सुदेश महतो की एक प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें वे कह रहे हैं कि आजसू के संघर्ष को कोई संगठन छू नहीं पायेगा. साथ ही कहा है कि जब स्वार्थ पूरा नहीं होता तो कुछ लोग इधर-उधर जाते हैं.
इन सबके बीच आजसू, झारखंड की राजनीति वर्तमान में जिस दौर से गुजर रही है उसमें अतीत की चादर ओढ़ने में भी कम पड़ रही और बिछाने में भी.
