रांचीः कांग्रेस नेता और राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि केवल पेसा कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रावधानों की सही जानकारी आदिवासी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी जरूरी है.
रांची के बेड़ो के महादानी मैदान स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, इटकी के सभागार में ग्राम प्रधानों के साथ पेसा कानून, ग्रामसभा के अधिकार, ग्राम स्वशासन एवं पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श एवं संवाद कार्यक्रम में वे बोल रही थीं.
उन्होंने कहा, “जब तक ग्राम प्रधानों, ग्रामसभा के सदस्यों, पारंपरिक नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों को पेसा कानून के अधिकारों व प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी नहीं होगी, तब तक इसके उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करना कठिन होगा.”
उन्होंने कहा कि झारखंड में 02 जनवरी 2026 को पेसा नियमावली का लागू होना राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है. इसके माध्यम से ग्रामसभाओं को उनके संवैधानिक व कानूनी अधिकारों के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है.
कृषि मंत्री ने कहा कि पेसा कानून केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा, सामुदायिक अधिकारों और ग्राम स्वशासन को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है. हमारा उद्देश्य है कि ग्रामसभा केवल औपचारिक संस्था बनकर न रह जाए, बल्कि वह जागरूक, सक्षम और स्थानीय स्वशासन की प्रभावी इकाई के रूप में कार्य करें.
आगे आएं ग्राम प्रधान: बंधु तिर्की
राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि गठबंधन सरकार द्वारा पेसा कानून के तहत ग्रामसभाओं को दिए गए अधिकारों का सही और जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल सुनिश्चित करना आवश्यक है. ग्राम प्रधानों को गांव के हाट-बाजार, स्थानीय विवादों व खनन सहित कानून के दायरे में आने वाले विभिन्न विषयों पर ग्रामसभा की भूमिका और अधिकारों को समझना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ग्रामसभा की जिम्मेदारी किसी एक जाति, धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है. गांव में रहने वाले सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और सभी के साथ निष्पक्षता व न्यायपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना ग्रामसभा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है..
बंधु तिर्की ने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. ग्राम प्रधानों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल मनमाने ढंग से करने के बजाय संवैधानिक व कानूनी प्रावधानों के अनुरूप करना चाहिए. उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपील की कि वे पेसा कानून की पुस्तक को ध्यानपूर्वक पढ़ें. उसके प्रत्येक प्रावधान को समझें और अपने अधिकारों व कर्तव्यों की पूरी जानकारी प्राप्त करें.
