रांचीः मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर बुधवार को सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लोकभवन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया.
रांची कॉलेज मैदान से जुलूस की शक्ल में निकले जेएमएम के हजारों कार्यकर्ता पार्टी के झंडे, बेनर लेकर निकले थे. इस दौरान वे नारेबाजी करते रहे. लोकभवन के सामने पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोका भी.
लोकभवन के सामने प्रदर्शन को लेकर जेएमएम की राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक विकास मुंडा, अमित कुमार, सुदीप गुड़िया, रामसूर्या मुंडा, केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय, सुप्रियो भट्टाचार्य, जिला अध्यक्ष मुस्ताक आलम समेत कई प्रमुख नेता शामिल थे.
इनके अलावा लोकभवन घेराव एवं प्रदर्शन कार्यक्रम में रांची, गुमला, रामगढ़, लोहरदगा, खूंटी जिला झामुमो के कार्यकर्ता शामिल थे. बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुटी थीं.
झामुमो के नेताओं ने एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त बीजेपी के इशारे पर काम करते रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रणाली में वोट को प्रभावित करते हैं.
ऐसे में उनका अपने पद पर बने रहना देश और यहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है.
महुआ माजी ने एसआईआर पर उठाए सवाल
राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने एसआईआर प्रक्रिया पर चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण आम लोगों को परेशानी हो रही है और कई लोगों को अपने नागरिक होने का प्रमाण देने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
महुआ ने कहा, “आज का यह प्रदर्शन देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पक्षपात पूर्ण रवैया के खिलाफ है. जब संवैधानिक संस्थाएं भी किसी पार्टी विशेष के पक्ष में काम करने लगेगी, तो लोकतंत्र कैसे बचेगा. यहां तो दो चुनाव आयुक्तों की बात ही मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं मान रहे थे, ऐसे में ज्ञानेश कुमार के रहते जितनी भी चुनावी प्रक्रियाएं पूरी की गई है, वह सब अवैध है.”
विकास मुंडा और अमित महतो ने भी साधा निशाना
विधायक विकास मुंडा ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए कई राज्यों में बीजेपी को चुनावी फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई. उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की. वहीं, जेएमएम विधायक अमित महतो ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया से आम लोगों को परेशानी हो रही है. उन्होंने इसे तत्काल रद्द करने की मांग की.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, “चुनाव आयोग जब अधिकृत रूप से कहता है कि हमसे गलती हुई है, हम इन चीजों को सुधार करेंगे, तब भाजपा के बड़े- बड़े नेता आयोग के पक्ष में आकर सफाई देते हैं. इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2024 का जनादेश ‘चोरी का जनादेश’ था. पश्चिन बंगाल का जनादेश ‘डकैती’ का जनादेश था, इसलिए लोगों के अंदर में, जो आक्रोश है, वह इस प्रदर्शन में दिख रहा है.”
