रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और गोपनीयता भंग हुई है. इसलिए दोषी और निर्दोष को अलग करना संभव नहीं है.
इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा अदालत में परीक्षा लेने वाली एजेंसी टीडीपीएल की भूमिका, परीक्षा की पारदर्शिता और पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी. साथ ही सिन्हा ने कहा कि नियुक्ति रद करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया है.
उन्होंने अदालत को सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए सरकार के रद्द करने वाले आदेश को नेचुरल जस्टिस के खिलाफ बताया.
वहीं, राज्य सरकार की ओर से वकील अच्युत केशव ने पक्ष रखा. कोर्ट को बताया गया कि अनुसंधान में व्यापक तौर पर गड़बड़ी सामने आ रही है. इस कारण से निर्दोष और दोषी अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं रह गया था. \इसलिए पूरी प्रक्रिया रद्द करना न्यायसंगत था.
अब जेपीएससी की परीक्षाओं को रद्द मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी.
परीक्षाओं में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जेपीएससी में अब तक जितनी भी बहाली प्रक्रियाएं हुई हैं, उनमें किसी न किसी चरण में खामियां देखने को मिली हैं. कभी पीटी परीक्षा में तो कभी मुख्य परीक्षा में कमियां देखने को मिली हैं.
गौरतलब है कि गुरुवार, आठ अक्टूबर को हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा रद्द मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
