रांचीः झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव जून महीने में संभावित है. चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज है और आंकड़ों का गणित सेट करने के साथ उम्मीदवारों पर सबकी नजरें टिकी है.
इस बीच जमशेदपुर पश्चिम से जदयू के विधायक सरयू राय ने एक्स पर जो कुछ कहा है, उसे लेकर कई किस्म की चर्चा शुरू है.
सरयू राय ने लिखा है, “झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों पर अगले माह चुनाव होंगे.संभावना है कि एक सीट के लिए राजनीतिक संपर्क वाले उद्योग जगत के कतिपय धनवान ज़ोर आज़माइश करें.ऐसा जेएमएम या भाजपा के समर्थन के बिना संभव नहीं होगा.ऐसे में हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी स्थानीय प्रत्याशी पर विचार करें.”
गौरतलू है कि झामुमो के संस्थापक अध्यक्ष शिबू सोरेन के निधन से राज्यसभा की एक सीट खाली हुई है. दूसरी सीट पर भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा हो रहा है.
क्या है अंकों का गणित
एक सीट पर जीत के लिए 28 विधायकों के वोट चाहिए होंगे. सत्तारूढ़ झामुमो के पास 34 विधायक हैं. शिबू सोरेन की जगह रिक्त होने पर झामुमो का ही एक सांसद होगा, यह तय माना जा रहा है.
दूसरी सीट पर कांग्रेस की दावेदारी है. अगर हेमंत सोरेन ने कांग्रेस के लिए सीट छोड़ी, तब भी उसे कुछ वोटों की जरूरत पड़ सकती है. कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं. सहयोगी दल झामुमो के 6, राजद के 4 और वाम दलों के 2 विधायकों के समर्थन के बाद भी उसे दो वोट और जुगाड़ने होंगे.
इधर भाजपा में 21 विधायक हैं. जबकि एनडीए में विधायकों की संख्या 24 है. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा से जयराम महतो एक विधायक हैं. वे किसे समर्थन देंगे, इसके पत्ते उन्होंने नहींं खोले हैं. भाजपा की भी सीधी नजर राज्यसभा चुनाव पर है.
जाहिर तौर पर जोड़-तोड़ का खेल अथवा हॉर्स ट्रेडिंग की संभावनाएं घर करती जा रही हैं. हालांकि किसी भी दल ने अब तक राज्यसभा चुनाव को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं.
परिमल नथवाणी के नाम की चर्चा
राजनीतिक गलियारे में परिमल नथवाणी के नाम की चर्चा जोरों पर है कि वे भाजपा के समर्थन से झारखंड में राज्यसभा का चुनाव लड़ सकते हैं.
पहले भी वे झारखंड से अलग-अलग दलों के विधायकों के समर्थन से राज्यसभा जा चुके हैं.
सरयू राय ने एक्स पर जो कुछ कहा है उससे भी यह बल मिल रहा है कि उद्योग जगत के किसी धनवान की नजर झारखंड में राज्यसभा की सीट पर है.
नथवाणी की पहचान केवल उद्योग जगत तक सीमित नहीं रही है, बल्कि वे झारखंड के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बेहतर संबंध रखने वाले व्यक्ति माने जाते हैं।
इन्हीं संपर्कों की वजह से उन्हें एक संभावित व स्वीकार्य उम्मीदवार के रूप में भी देखा जा रहा है.
हालांकि अभी तक न तो सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से और न ही भाजपा की तरफ से किसी उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा की गई है.
