सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है.
याचिका में उन फ़ैसलों को चुनौती दी गई है जिन्हें सीईसी के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की कथित मंजूरी के बिना लिया था.
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के समक्ष इस मामले का ज़िक्र किया गया.
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से कहा कि कानून के तहत बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने कुछ फैसले निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए.
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है. मौजूदा समय में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं. कानून के मुताबिक, तीनों के बीच किसी मुद्दे पर सहमति नहीं होने की स्थिति में फैसला बहुमत के आधार पर लिया जाना है.
गौरतलब है कि अंग्रेजी अख़बार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में कहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में भारत निर्वाचन आयोग के फ़ैसलों और कामकाज की प्रक्रिया को लेकर आंतरिक तौर पर आपत्तियां उठाईं.
अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़, पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्तियां जताई थीं.
इस रिपोर्ट के बाद देश के विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों ने सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.
