रांचीः झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी नहीं लगाये जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने मामले में राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव एवं डीजीपी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के पूर्व उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट में डीजीपी तदाशा मिश्रा हाजिर थीं.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा थानों में सीसीटीवी लगाए जाने के मामले में राज्य सरकार कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करना चाहती है. इसलिए वह अपने शपथ पत्र में वास्तविक स्थिति को छुपाकर टालमटोल रवैया अपना रही है. ऐसे में कोर्ट के समक्ष तीनों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का ही विकल्प नजर आता है.
हालांकि, अदालत ने पहले तीनों वरिष्ठ अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है.
अदालत ने कहा, वर्ष 2018 के बाद से अबतक पुलिस हिरासात में मौतों की संख्या 450 से ज्यादा है, इसके बावजूद भी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरा लगाने को लेकर चार बार टेंडर किए गए लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं आया. बार- बार सुनवाई में भी सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं दी जा सकी है.
सरकार की कार्यशैली पर सवाल
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार अपेक्षित कदम नहीं उठा सकी है. अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार सीसीटीवी लगाने के मामले में आदेशों का पालन नहीं करना चाहती और अपने शपथ पत्रों में वास्तविक स्थिति छुपाकर मामले को टालने की कोशिश कर रही है.
स्वतः संज्ञान से दर्ज हुई थी याचिका
यह मामला ईचागढ़ पुलिस हिरासत में गिरफ्तार व्यक्ति को प्रताड़ित किए जाने की घटना से जुड़ा है, जिसे झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका में तब्दील किया था. इसके बाद अदालत राज्यभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देशों के अनुपालन की लगातार निगरानी कर रही है.
