संसद के मॉनसून सत्र को लेकर सरकार की बुलाई सर्वदलीय बैठक का विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया. विपक्षी सांसदों का तर्क है कि सरकार ने टीएमसी के बाग़ी 20 सांसदों के गुट को बैठक में बुलाया, जबकि स्पीकर ओम बिरला ने अभी इनके गुट को मान्यता नहीं दी है.
यह बैठक संसद भवन में सुबह 11 बजे एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में शुरू हुई. इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और डीएमके सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए. लेकिन कुछ देर बाद ही विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “आज पूरे विपक्ष ने ऑल पार्टी मीटिंग से वॉकआउट किया है. यह विरोध इसलिए किया गया क्योंकि तथाकथित एनसीपीआई, जो कि एक मान्यता प्राप्त पार्टी नहीं है. टेबल ऑफिस की ओर से दी गई सूची में टीएमसी की सांसद संख्या 28 दिखाई गई है.”
महुआ मोइत्रा ने कहा कि 20 बाग़ी सांसदों के विलय को अभी तक स्पीकर ने मंज़ूरी नहीं दी है. इन 20 सांसदों के खिलाफ़ अयोग्यता की याचिकाएं भी अभी लंबित हैं.
उन्होंने कहा कि 91वें संशोधन के बाद अलग समूह बनाने की कोई जगह नहीं है. ऐसे में संसदीय कार्य मंत्री ने इन 20 बाग़ी सांसदों को किस आधार पर बैठक का निमंत्रण दिया और वे इस बैठक में कैसे शामिल हुए.
महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष ने इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और विरोध के तौर पर सर्वदलीय बैठक से बाहर निकल गया.
उन्होंने सभी विपक्षी दलों का धन्यवाद भी किया.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि हमने विपक्षी दलों के समर्थन में बैठक से वॉकआउट किया.
उन्होंने बताया, “संविधान की अवहेलना करके टीएमसी, आम आदमी पार्टी और शिवसेना के साथ जो कुछ हुआ है… उनके समर्थन में संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस ने बैठक से वॉकआउट किया है.”
गौरतलब है कि 18वीं लोकसभा का 9वां संसदीय सत्र यानी मॉनसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा.
