रांचीः विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पांच जून को अबुआ अधिकार मंच द्वारा रांची के पहाड़ी मंदिर परिसर में बांस के पौधों का वृक्षारोपण अभियान चलाया गया.
कार्यक्रम का उद्देश्य पहाड़ी मंदिर की हरियाली को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना था.
इस अवसर पर अबुआ अधिकार मंच के संस्थापक वेदांत कौस्तव ने कहा कि पहाड़ी मंदिर केवल भक्ति और आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि रांची की पहचान और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल और जमीन से रही है तथा पहाड़ी मंदिर की हरियाली को संरक्षित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.
हरियाली बढ़ाने का माध्यम
वेदांत ने कहा कि बांस के पौधों का चयन विशेष रूप से इसलिए किया गया है क्योंकि बांस तेजी से विकसित होता है, पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकने में सहायक होता है तथा कम समय में हरियाली बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि पहाड़ी मंदिर की उस हरित पहचान को पुनर्स्थापित करना है जिसके लिए यह कभी जाना जाता था.
इसके साथ ही उन्होंने लोगों से भी पहाड़ी मंदिर की हरियाली बढ़ाने के इस अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया.
कार्यक्रम के दौरान कल्पशक्ति फाउंडेशन के संस्थापक निखिल मेहुल भी उपस्थित थे. उन्होंने मंदिर परिसर में विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कल्पतरु वृक्ष का रोपण किया तथा प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।
पार्षद की सहभागिता
इस अवसर पर वार्ड 29 के पार्षद सुनील यादव ने कहा कि किसी भी वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक सफलता केवल पौधे लगाने में नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण में निहित होती है। उन्होंने कहा कि यदि समाज और स्थानीय समुदाय मिलकर इस जिम्मेदारी को निभाएं तो ऐसे अभियान स्थायी परिणाम दे सकते हैं.
उन्होंने उपस्थित लोगों से लगाए गए पौधों की देखरेख करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति निरंतर जागरूक रहने का आह्वान किया.
अबुआ अधिकार मंच ने भविष्य में भी पहाड़ी मंदिर परिसर में हरियाली बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जनजागरूकता कार्यक्रम चलाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.
मौके पर मंच के संरक्षक आशुतोष गोस्वामी, अनुराग यादव, प्रिंस यादव, पंकज तिवारी सहित अबुआ अधिकार मंच के सदस्य एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे.
