रांचीः झारखंड में राज्यसभा को लेकर कांग्रेस के द्वारा उम्मीदवार की घोषणा पर सत्तारूढ़ तथा कांग्रेस के सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आंखे तरेर दी है. झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि कांग्रेस ने बिना सहमति के उम्मीदवार की घोषणा कर पार्टी को ठेस पहुंचाया है. जेएमएम दोनों सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है.
सुप्रियो भट्टाचार्या ने मीडिया से बातचीत में कहा, हमने पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना से केंद्रीय अध्यक्ष और गठबंधन के नेता हेमंत सोरेन को अवगत करा दिया गया है. इस बारे में उन्हें ही अंतिम फैसला लेना है.
गौरतलब है कि गुरुवार की रात कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव को लेकर अलग- अलग राज्यों के लिए अपने सात उम्मीदवारों की सूची जारी की है. इनमें झारखंड से प्रवण झा को उम्मीदवार बनाया गया है. पांच जून को प्रणव झा रांची पहुंचे हैं. उन्होंने कांग्रेस विधायकों से मुलाकात भी की. झारखंड में कांग्रेस के प्रभारी के राजू भी रांची में ही हैं.
जेएमएम को आपत्ति
जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राजद, माले के 56 विधायक है. हमारा गठबंधन दोनों सीटों पर जीत के लिए पर्याप्त है. लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ही गठबंधन का नेतृत्व किया था. इसलिए राज्यसभा चुनाव में उनके फैसले का इंतजार करना था.
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए गठबंधन में एक भी सीट नहीं छोड़ी गई, जबकि हमारी तरफ से चुनाव लड़ने की पेशकश की गई थी.
हालांकि बीते शुक्रवार को झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने हेमंत सोरेन से मुलाकात कर एक सीट पर दावेदारी की थी.
इस बीच कांग्रेस ने अलग-अलग राज्यों के लिए सात उममीदवारों के नाम की सूची जारी कर दी है. इनमें झारखंड से प्रणव झा का नाम शामिल है.
कांग्रेस के नेताओं ने हेमंत सोरेन से बातचीत कर एक सीट पर दावेदारी तो की ही थी, इस सवाल पर सुप्रियो कहते हैं कि बातचीत पर आपसी सहमति से निर्णय तो नहीं सुनाया गया था. कांग्रेस को इंतजार करना चाहिए था.
हेमंत ने नहीं खोले हैं पत्ते
इधर झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और झारखंड में गठबंधन के सबसे बड़े दारोमदार हेमंत सोरेन ने राज्यसभा चुनाव को लेकर फिलहाल कोई पत्ते नहीं खोले हैं.
साथ ही झारखंड में गठबंधन दलों के नेताओं की कोई आधिकारिक तौर पर बैठक नहं हुई है.
18 जून, 2 सीटें और अंकगणित
दो सीटों पर होने वाले चुनाव में एक सीट झामुमो के संस्थापक अध्यक्ष शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई है. दूसरी सीट पर भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने वाला है.
झारखंड में सत्तारूढ़ दलों के पास 56 विधायक हैं और अगर एकजुट और रणनीतिक ढंग से वे चुनाव लड़े, तो दोनों सीटों पर उनकी जीत हो सकती है.
दरअसल, 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 28 विधायकों के वोट की जरूरत होगी.
इनमें झामुमो के पास 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक शामिल हैं.
अंकगणित के लिहाज से दोनों सीट सत्तारूढ़ दल जीत सकते हैं.
राजद के वोटों का फैसला तेजस्वी यादव लेंगे और भाकपा माले के दो वोटों को लेकर पार्टी महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य का निर्णय अहम होगा.
बीजेपी की नजरें कहां पर है
वहीं संख्याबल नहीं होते हुए भी बीजेपी ने राज्यसभा में उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है. जाहिर तौर पर बीजेपी की नजर सत्तारूढ़ दलों के विधायकों पर है. बीजेपी के पास 21 विधायक हैं. और एनडीए में 24.
एक वोट झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के जयराम महतो का है. जयराम किसका साथ देंगे, उन्होंने भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. लेकिन कांग्रेस और बीजेपी दोनों जयराम का वोट हासिल करना चाहेगी.
लेकिन सत्तारूढ़ दलों में कोई पेच नहीं फंसा और हेमंत सोरेन ने दिल से ऱणनीतिक कमान संभाल ली, तो भाजपा की राह कठिन होगी.
